Monday

Back from hiatus.. (atleast for now..)

After a long hiatus.. I am back to blogging again...I figured that if I put off things due to lack of time, I'll probably never get to them.. My life is getting busier day by day.. and if I want to do something, I should probably try to squeeze it in the hectic schedule somehow.. :) We'll see how long i continue on this thought process..

I am not sure if I can keep up with the blogging.. but, at least resolving to start again.. is a big deal.. right ?!

Wednesday

मेघा छाए आधी रात - शर्मीली

मेघा छाए आधी रात
बैरन बन गई निंदिया
बतादे मैं क्या करुँ
मेघा छाए आधी रात

सब के आँगन दिया जले रे मोरे आँगन जिया ...
हवा लागे शूल जैसी ताना मारे चुनरिया ...
आई है आँसूं की बरात ...
बैरन बन गई निंदिया
बतादे मैं क्या करुँ
मेघा छाए आधी रात
बैरन बन गई निंदिया

आ आ
रूठ गए रे सपने सारे टूट गई रे आशा ....
नैन बहे रे गंगा मोरे फिर भी मन हें प्यासा ....
किसे काहूँ रे मन की बात
बैरन बन गई निंदिया
बतादे मैं क्या करून
मेघा छाए आधी रात
बैरन बन गई निंदिया

कुछ दिल ने कहा..- अनुपमा

कुछ दिल ने कहा.. आ ..
कुछ भी नही ... ई ई
कुछ दिल ने सुना ... आ आ
कुछ भी नही ....ई

ऐसी भी बातें होती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं
कुछ दिल ने कहा.. आ..
कुछ भी नही ....

लेता है दिल अन्ग्दायिन्यान
इस दिल को समझाए कोई
आरमान न आँखें खोल दे
रसुवा न हो जाए कोई
पलकों की ठंडी सेज पर
सपनों की परियां सोती हैं

ऐसी भी बातें होती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं
कुछ दिल ने कहा आ आ
कुछ भी नहीं ..

दिल की तसल्ली के लिए
झूटी चमक झूठा निखार
जीवन थो सूना ही रहा
सब समझे आई है बहार
कलियों से.. कोई पूछता ...
हस्तीं हैं वोह या रोती हैं

ऐसी भी बातें होती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं
कुछ दिल ने कहा ...
कुछ भी नही .... ई ...

कुछ दिल ने सुना आ आ ..
कुछ भी नही .... ई ॥

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